इसे हेलीकॉप्टर का मॉडल बनाने को कहा था, पर काम में इतना मज़ा आया कि पूरा हेलीकॉप्टर ही बना डाला
इसे हेलीकॉप्टर का मॉडल बनाने को कहा था, पर काम में इतना मज़ा आया कि पूरा हेलीकॉप्टर ही बना डाला
इसे हेलीकॉप्टर का मॉडल बनाने को कहा था, पर काम में इतना मज़ा आया कि पूरा हेलीकॉप्टर ही बना डाला

ऐसा लगता है कि ग्रैविटी के सिद्धांतों को शर्मिंदा करना केरल के लोगों का नया शगल बन गया है. कुछ समय पहले इडुक्की के एक व्यक्ति ने एक एयरक्राफ्ट बनाकर सुर्खियां बटोरी थी. ये शख़्स रिसाइकल्ड और इस्तेमाल हुई चीज़ों से टू सीटर अल्ट्रालाइट एयरक्राफ्ट बनाकर कई रिकॉर्ड बुक्स में शामिल होने में कामयाब रहे थे. इसे हेलीकॉप्टर का मॉडल बनाने को कहा था, पर काम में इतना मज़ा आया कि पूरा हेलीकॉप्टर ही बना डाला.

डेढ़ साल पहले एक दिव्यांग शख़्स साजी थॉमस ने भी एक छोटे एयरक्राफ्ट का निर्माण किया था. 45 साल के थॉमस को इस विमान को बनाने में पांच साल का समय लगा था. उनकी ज़िंदगी से प्रभावित हो कर अभी तक दो मलयालम फ़िल्में भी बन चुकी हैं.

अब कुछ ऐसा ही कारनामा 54 साल के डी. सदाशिवन ने कर दिखाया है. इंजीनियरिंग वर्कशॉप चलाने वाले और महज दसवीं तक पढ़ाई करने वाले सदाशिवन ने अपने घर पर जीता-जागता हेलीकॉप्टर खड़ा कर दिया.

डी. सदाशिवन ने इस हेलीकॉप्टर को बनाने में चार साल का समय लिया. दरअसल, कांजीराप्पाली के एक प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल ने उन्हें एक हेलीकॉप्टर के मॉडल बनाने के लिए दरख़्वास्त की थी, लेकिन सदाशिवन इस काम में इस कदर डूबे कि उन्होंने पूरे हेलीकॉप्टर का ही निर्माण कर दिया.

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सदाशिवन अब अगले महीने इस स्कूल में इस विमान की टेस्ट फ़्लाइट की तैयारी कर रहे हैं. गौरतलब है कि उनकी बेटी भी इसी स्कूल में पढ़ती है. सदाशिवन ने इस हेलीकॉप्टर के लिए मारुति 800 के इंजन और एक रिडक्शन गियर बॉक्स का इस्तेमाल किया. हालांकि इसके अलावा बाकी सारे पुर्ज़ों को उन्होंने अपनी वर्कशॉप में ही बनाया.

सदाशिवन के इस हेलीकॉप्टर का अंदरुनी हिस्सा लोहे का है और इसका बाहरी हिस्सा एल्युमिनियम का है. खास बात ये है कि हेलीकॉप्टर की विंडस्क्रीन के लिए इस शख़्स ने ऑटोरिक्शा के ग्लास का इस्तेमाल किया है.

हालांकि इसे उड़ाने के लिए सदाशिवन को कई एजेंसियों से परमिशन लेनी होगी और इस पूरी प्रक्रिया में एक महीने का वक्त लग सकता है.