कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!
कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!
कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!

भारत, सदियों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरती के तौर पर जाना जाता रहा है. विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति को समृद्ध बनाए रखने में भारत के धर्मस्थलों की भी अहम भूमिका रही है. आपने भी इन धर्मस्थलों या मंदिरों में पारंपरिक चढ़ावे चढ़ाए ही होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के कई मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर कई दिलचस्प चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है?

अलागर मंदिर, मदुरई

कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!
कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!

भगवान विष्णु के इस मंदिर का असली नाम कालास्हागर था. इस मंदिर में लोग भगवान विष्णु पर कई प्रकार के डोसा और अनाज चढ़ाते हैं. अनाज से बनने वाले डोसे का सबसे पहले भोग भगवान विष्णु को लगाया जाता है और बाकी के डोसा को भक्तों में प्रसाद के तौर पर बांट दिया जाता है.

कामाख्या देवी मंदिर, असम

कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!
कहीं चढ़ती है Wine, तो कहीं किताबें. इन मंदिरों की कहानियां साबित करती हैं कि इंडिया जैसी जगह नहीं!

गुवाहाटी में मौजूद कामाख्या मंदिर की कहानी बेहद दिलचस्प है. जून में होने वाले अंबुबाची त्योहार के पहले तीन दिन इस मंदिर को बंद रखा जाता है. चौथे दिन इस मंदिर का द्वार भक्तों के लिए खुलता है. देवी के Menstrual Fluid की मौजूदगी वाले छोटे कपड़ों को श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है. इस त्योहार के दौरान कामाख्या देवी के दर्शन के लिए हज़ारों भक्त पहुंचते हैं.

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